नगर निगम बिलासपुर में 10 लाख की सड़क योजना में घोटाला… जोन-6 में SC विकास फंड का खेल: सड़क बनी कहीं और, भुगतान कहीं और…

बिलासपुर Bilaspur news। नगर निगम के जोन क्रमांक-6 में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद के तहत हुए सड़क निर्माण कार्यों में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। दस्तावेजों, वर्क ऑर्डर और स्थानीय शिकायतों के आधार पर यह मामला अब उच्च स्तरीय जांच के घेरे में आता दिख रहा है। आरोप है कि स्वीकृत कार्य स्थल को मनमाने तरीके से बदलकर दूसरी जगह सड़कें बनाईं गईं और उसी आधार पर भुगतान भी कर दिया गया।

मामला वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 10 लाख रुपये की दो सड़क परियोजनाओं से जुड़ा है, जो अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से जारी की गई थीं। स्वीकृत वर्क ऑर्डर के अनुसार वार्ड क्रमांक 41 में लव सिंह के घर से नकवी के घर तक तथा दूसरी सड़क सुक्खू किराना स्टोर से विनोद सिंह के घर तक निर्माण होना था। लेकिन आरोप है कि जोन-6 में पदस्थ सहायक अभियंता चंद्रशेखर साहू ने बिना किसी सक्षम अनुमति के पूरा स्थल ही बदल दिया। निर्धारित स्थानों के बजाय सड़क निर्माण रानी पाठक के घर से रॉयल रेसिडेंसी के पास तक तथा पटेल भवन के सामने से नसीम खान की खुली जमीन तक कर दिया गया।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे स्थल परिवर्तन की न तो आदिम जाति कल्याण विभाग को सूचना दी गई और न ही नगर निगम की महापौर-इन-काउंसिल से स्वीकृति ली गई। नियमों के अनुसार किसी भी निर्माण कार्य में स्थल परिवर्तन से पहले विभागीय अनुमति और एमआईसी की मंजूरी अनिवार्य होती है, लेकिन यहां इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, मेजरमेंट बुक (माप पुस्तिका) में भी गंभीर हेराफेरी की गई है। मौके पर जो कार्य हुआ ही नहीं, उसे भी रिकॉर्ड में दर्ज कर भुगतान कर दिया गया। मेजरमेंट बुक में संबंधित सब इंजीनियर के सील और हस्ताक्षर भी पाए गए हैं, जिससे रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय निवासियों ने भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर तीखी आपत्ति जताई है। मातुश्री अपार्टमेंट क्षेत्र के लोगों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण बेहद घटिया स्तर का किया गया है और मानकों की खुली अनदेखी हुई है।
सुक्खू किराना स्टोर वाली गली में लगभग 30 मीटर सड़क निर्माण की बात सामने आई है, जबकि माप पुस्तिका में इससे अधिक लंबाई दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क कुछ ही महीनों में उखड़ने लगी है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।इसके अलावा, स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि सड़क की मोटाई मानक से कम रखी गई है। उनका कहना है कि लगभग चार इंच मोटाई में सड़क बनाई गई, जबकि माप पुस्तिका में छह इंच (15 सेंटीमीटर) दर्ज है और उसी आधार पर पूरा भुगतान कर दिया गया। इससे साफ तौर पर भुगतान और वास्तविक कार्य में बड़ा अंतर सामने आ रहा है।
नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और तकनीकी जांच कराई जाए, जिसमें स्थल निरीक्षण, माप पुस्तिका का मिलान और भुगतान प्रक्रिया की गहन समीक्षा शामिल हो। आशंका जताई जा रही है कि जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हो सकती हैं।
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से होने वाले कार्यों का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के बुनियादी विकास को मजबूत करना है, लेकिन इस प्रकरण ने पूरी योजना की पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
