बिलासपुर: कृष्णा पब्लिक स्कूल: फीस वसूली, निजी किताबें और फर्जी परीक्षा केंद्र को लेकर घिरा प्रबंधन… प्रबंधन बोला- 5वीं 8वीं की कक्षाएं बंद कर दी हैं… फिर…

विद्यालय द्वारा कथित रूप से छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा केंद्र संख्या को लेकर फर्जीवाड़ा किया गया है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और संभावित धोखाधड़ी का मामला माना जाएगा।

बिलासपुर में निजी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था, मान्यता नियमों के पालन और परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल एक बार फिर गहराते नजर आ रहे हैं। कृष्णा पब्लिक स्कूल समूह पर लगे आरोपों ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, बल्कि अभिभावकों के बीच भी गहरी चिंता और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। NSUI के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह द्वारा स्कूल प्रबंधन को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन ने पूरे मामले को और अधिक विवादित और संवेदनशील बना दिया है।

ज्ञापन में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CG Board) से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद विद्यालय प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित नहीं कराया जा रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर मान्यता शर्तों का उल्लंघन मानी जा रही है। नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने विद्यार्थियों को संबंधित बोर्ड की परीक्षा में शामिल कराएं, ताकि उनकी शैक्षणिक योग्यता का औपचारिक और पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके।

आरोप यह भी है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा इस प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा से वंचित रखा जा रहा है, जिससे उनके शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। अभिभावकों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि वर्षों की पढ़ाई के बाद भी बच्चों को वैधानिक बोर्ड प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हो पा रहा है, जिससे उनका भविष्य अनिश्चितता में चला गया है।

ज्ञापन में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि विद्यालय में छत्तीसगढ़ बोर्ड की निर्धारित पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें लागू की जा रही हैं। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। जबकि सरकारी नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त विद्यालयों में निर्धारित पाठ्यक्रम और स्वीकृत शैक्षणिक सामग्री का उपयोग किया जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता बनी रहे।

इसके अतिरिक्त शुल्क संरचना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा मनमानी फीस वसूली की जा रही है, जबकि मान्यता शर्तों के अनुसार विद्यालयों को “नो प्रॉफिट नो लॉस” के सिद्धांत पर संचालित किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, अभिभावकों से भारी-भरकम फीस वसूली के आरोपों ने शिक्षा के व्यवसायीकरण की आशंका को और मजबूत कर दिया है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यालय द्वारा कथित रूप से छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा केंद्र संख्या को लेकर फर्जीवाड़ा किया गया है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और संभावित धोखाधड़ी का मामला माना जाएगा।

सबसे गंभीर आरोपों में यह भी शामिल है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर रोक लगाने के स्पष्ट आदेश के बावजूद विद्यालय प्रबंधन द्वारा इन निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर शासन के आदेशों की अवमानना के दायरे में आती है।

इधर, विद्यालय प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा है कि इस सत्र से कक्षा 5वीं और 8वीं की पढ़ाई बंद कर दी गई है। हालांकि इस बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है। NSUI ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि केवल कक्षा 1 से 4 तक संचालन की अनुमति है, तो शिक्षा विभाग को इस नीति की स्पष्ट व्याख्या करनी चाहिए।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि विद्यालयों द्वारा ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की जा रही है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि फीस निर्धारण के लिए कोई पारदर्शी समिति गठित नहीं की गई है और अभिभावकों को बैठक की कार्यवाही की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जाती।

इन सभी आरोपों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या निजी विद्यालय वास्तव में मान्यता की शर्तों का पालन कर रहे हैं या फिर शिक्षा व्यवस्था को व्यावसायिक लाभ का माध्यम बना लिया गया है। अभिभावकों का कहना है कि यदि इस स्थिति पर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया तो यह पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर देगा।

NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि इन मामलों में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा। इस पूरे विवाद ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को भी सक्रिय कर दिया है, और अब सभी की निगाहें संभावित जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

मुख्य बिंदु

1. कृष्ण पब्लिक स्कूल समूह पर आरोप है कि CG Board से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं कराया जा रहा है।

2. कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं CG Board से कराने के निर्देशों के बावजूद पालन न करने का आरोप है।

3. जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के बावजूद निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का उपयोग किया जा रहा है।

4. निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की कीमत लगभग 5000 रुपये से अधिक (कक्षा 5वीं स्तर पर) बताई जा रही है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने और कमीशनखोरी की आशंका जताई गई है।

5. स्कूल में फीस निर्धारण समिति, उसकी सूची और बैठक की कार्यवाही सार्वजनिक न करने का आरोप है।

6. पिछले 5 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने और वित्तीय पारदर्शिता की कमी का आरोप है।

7. ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ के नियम के बावजूद लाखों रुपये की फीस वसूली कर अवैध लाभ लेने का आरोप लगाया गया है।

8. स्कूल द्वारा दिया गया CG Board परीक्षा केंद्र नंबर फर्जी होने की आशंका जताई गई है और जांच की मांग की गई है।

9. स्कूल प्रबंधन ने सफाई दी है कि इस सत्र से कक्षा 5वीं और 8वीं की पढ़ाई बंद कर दी गई है।

10. NSUI ने इस पर सवाल उठाया है कि 1 से 4 तक कक्षाएं संचालित करने का स्पष्ट नियम क्या है।

11. मामले को लेकर NSUI ने आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

12. पूरा मामला अब शिक्षा विभाग की जांच और संभावित कार्रवाई के दायरे में है।