छत्तीसगढ़: गिरिजा को मिली एनीमिया से मुक्ति… मयंक से दूर हुआ कुपोषण… मां और बच्चे के लिए वरदान बनी मुख्यमंत्री सुपोषण योजना…

रायपुर। रायपुर जिले के आरंग विकासखण्ड के ग्राम गुजरा की श्रीमती गिरजा मिरी और उनके नन्हें बच्चें मंयक की यह कहानी बेहद प्रेरणास्पद और अनुकरणीय है। यह कहानी बताती है कि कैसे एक छोटी सी पहल माॅ को एनिमिया से मुक्ति दिलाने के साथ उसके नन्हें बच्चें को भी कुपोषण से मुक्ति दिलाकर उनके पुरे भविष्य के लिए सुखद बदलाव ला सकती है।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ रायपुर जिले में भी मुख्यमंत्री सुपोषण योजना ने माॅ गिरजा के साथ उसके पुत्र मयंक जैसे सैकडों- हजारों माॅ और उनके बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। आंगनबाडी केन्द्र क्रमांक 1 गुजरा की आगंनबाड़ी कार्यकर्ता अहिल्या मिरी ने बताया कि उनके केन्द्र में अनेक बच्चे और गर्भवती एवं प्रसुता महिलाए आती हैं और यहां उन्हें पोषण आहार देने के साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास के साथ शैक्षणिक विकास का कार्य भी किया जाता हैं। ऐसी ही प्रयासों की बानगी मुख्यमंत्री सुपोषण योजना बनी है, जो कुपोषण और एनीमिया दोनो से एकसाथ जंग जीत रही है।

आगंनबाड़ी कार्यकर्ता अहिल्या मिरी ने बताया कि माता गिरजा के यहां मयंक का जन्म समय से पूर्व ही केवल साढे आठ माह में हो गया था। पता चला मैं जब उसके घर गयी और बच्चे का वजन लिया तो उस समय उसका वजन केवल 1ण्9 किलो ग्राम था। उसकी कमजोर स्थिति देखकर उसकी माॅ और मैं बहुत दुखी हुई।

आगंनवाडी कार्यकर्ता ने ऐसे समय माॅ को समझाया कि तुम्हारे बेटे को अभी बहुत ज्यादा देखभाल की जरुरत है। उसने कंगारु मदर केयर, संक्रमण और नियमित स्तन पान के बारे में भी बताया। उनके और पर्यवेक्षक श्रीमती ममता गायकवाड मैडम के द्वारा नियमित रूप से गृहभेंट किया गया।

  इसी समय छत्तीसगढ़ राज्य में 2 अक्टूबर 2019 को लक्ष्य सुपोषण योजना की शुरुआत हुई। इस योजना में मयंक को शामिल किया गया। उस समय उसकी आयु 2 वर्ष 3 माह थी और उसका का वजन मात्र 8ण्5 किलो ग्राम था। इतने कम वजन एवं गंभीर श्रेणी में होने के कारण उन्होंने निश्चय किया कि उसे सामान्य श्रेणी में लाने का हर संभंव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने लगातार घर जाकर परिवार के सदस्यो से चर्चा किया और अच्छें स्वास्थ्य एवं सुपोषित खान-पान की जानकारी दी। लक्ष्य सुपोषण योजना के अन्तर्गत दूध बिस्किट,केला लडडू, गरम भोजन चावल,दाल, रोटी सब्जी खिलाया जाता और सप्ताह में तीन बार वजन किया जाता। इसी तरह साफ-सफाई पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया गया।

कुछ समय बाद मयंक के स्वास्थ्य में सुधार आता गया और पहले वह गंभीर कुपोषण से मध्यम कुपोषण की श्रेणी में आया फिर सामान्य बच्चों की श्रेणी में आ गया। अब उसका वजन बढकर 12 किलोग्राम हो गया है। वह अन्य बच्चों के साथ अच्छे से खेलता है। उसके माता-पिता भी अब बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर खुश है।
 
इसी तरह महतारी जतन योजना और प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के अन्तर्गत उसकी माॅ गिरजा को भी लाभ दिलाया गया। गिरजा भी नियमित रूप से दोपहर में आंगनबाड़ी आकर गरम भोजन के तहत भोजन करती साथ ही अण्डा, केला और दाल में मुनगा-भाजी पावडर आदि का भी सेवन करती। इसी तरह आयरन टेबलेट का भी नियमित सेवन करती, इससे उसका भी वजन बढ़ा और अब वह एनीमिया से मुक्त हो गई है।

गिरजा के परिवार के सदस्य उनके स्वास्थ्य में आये सुधार के लिए राज्य शासन को कोटिशः धन्यवाद देते है और कहते है कि मुख्यमंत्री सुपोषण योजना ने उनके परिवार के लिए एक सुखद अध्याय जोड़ा है।

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