बिलासपुर ब्रेकिंग: फर्जी SC सर्टिफिकेट से 20 साल पहले हथियाई पटवारी की नौकरी… जांच दबाकर कोरबा से फिर बिलासपुर लौटा… अब बिल्हा तहसील में जमाया कब्जा…
बिलासपुर में आरक्षण घोटाला: फर्जी जाति प्रमाण पत्र से SC कोटे में OBC की नियुक्ति, 20 साल बाद भी कार्रवाई नहीं

बिलासपुर। नेशनल के नाम पर सरकारी नौकरी हथियाने का एक घोटाला मामला सामने आया है। अविभाजित बिलासपुर जिले के निवासी एक युवा ने 20 साल पहले फोर्टीफाइड जाति प्रमाण पत्र के आधार पर पटवारी पद पर उपलब्धि हासिल कर ली थी, जबकि वह खुद अन्य पाली वर्ग से आता है। शिकायत और जांच के बाद भी इस प्रकरण को दबा दिया गया और अब फिर से बिलासपुर जिले के बिल्हा तहसील में सामुदायिक कर्मचारी हो गए हैं।
20 साल पुराना खेल, अब तक बेख़ौफ़
सरकारी एजेंसियों के अनुसार वर्ष 2004-05 के आसपास एससी ओल्ड कोटे से पटवारी पद पर हुई थी। फैक्टरी के समय में उसका वास्तविक जाति प्रमाण पत्र ओबीसी वर्ग का होता है। फैक्ट्री के बाद वह लंबे समय तक बिलासपुर जिले के विभिन्न हिस्सों में यात्रा करते रहे। इस दौरान उन्होंने राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और जमीनों के नामांतरण-बंटवारा जैसे काम किया।
मुक़दमा हुआ तो कोरबा भागा, मामला मुक़दमा
करीब 13 साल पहले जब इसकी शिकायत की जांच की गई तो प्रारंभिक जांच शुरू हो गई। जांच में प्रथमदृष्टया गड़बड़ी सामने आने पर अमूर्त पर कार्रवाई की जगह उसे अवशेष कोरबा जिले में स्थानांतरित कर दिया गया। आरोप है कि उस समय विभाग के कुछ अधिकारियों और राजस्व संग्रहालय के दस्तावेजों से पूरा एपिसोड दबा दिया गया। जांच रिपोर्ट को कोल्ड बस्ते में कैथोलिक फ़ाइल बंद कर दी गई।
7 साल बाद फिर बिलासपुर में प्रवेश
कोरबा में करीब 7 साल तक रहने के बाद आमलेट पटवारी की पोस्टिंग फिर बिलासपुर से कर दी गई। वर्तमान में वह बिल्हा तहसील के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण वैधानिक पटवारी हैं। ठेकेदार की बात ये है कि 20 साल पुरानी याचिका और फर्जी घोटाले के आरोपी राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज के बाद भी उस पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। न निरस्त्रीकरण हुआ, न सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई।
कैसे हुआ फर्जी ऑफर
राजस्व विभाग के कर्मचारी हैं कि 2000 के दशक की शुरुआत में राजस्व विभाग के कर्मचारियों का डिजिटल ट्रांसलेशन सिस्टम नहीं था। उसी का लाभ एथेंस तहसील स्तर से एससी का फर्जी प्रमाण पत्र लिया गया। कंपनी के बाद जब भी जांच की नौबत आई, तो फ्लिपकार्ट ने राजनीतिक रसूख और डिविजन सेटिंग से हर बार मामले को रफा-दफा करवा दिया।
एससी समाज में नामांकन, नामांकन से याचिका की तैयारी
मामले के शामिल होने के बाद बेंचमार्क जाति समाज के अनुयायियों में भारी पहचान है। धर्मगुरु का कहना है कि एक ओबीसी व्यक्ति ने 20 साल तक एससी वर्ग के हक में नौकरी हासिल की। इससे एससी पात्रता नौकरी से आरक्षण रह गया। पिपरियात ने नेपोलियन और कमिश्नरी कमिश्नर को सीलबंद यूक्रेनी सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
क्या कहते हैं नियम
सामान्य प्रशासन विभाग के भंडारी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी प्राप्त करना गंभीर कदाचार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई शेयरधारकों से कहा है कि ऐसे फेस्टिवल से ही जीरो मांगेगा। वेतनभोगियों के साथ सेवा से बर्खास्तगी और बीएनएस 318, 336 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आरोप है।
प्रशासन मौन, रिकार्ड रिकार्डा जा रहा है
इस रिश्ते में बिल्हा अकीता का कहना है कि समसामयिक माहौल में आया है। पुराने रिकार्ड रिकार्डे जा रहे हैं। वहीं डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 20 साल पुरानी के कारण फाइल खोजी जा रही है। जांच के बाद जांच कार्रवाई की जाएगी।
अब भी सवाल करें
1. 20 साल तक फ़र्ज़ी फर्म कैसे चलती रहती है?
2. प्रथम जांच रिपोर्ट कहां खो गई?
3. कोरबा सीताफल मामले में विस्तार वाले घटक कौन थे?
4. 7 साल बाद फिर बिलासपुर किसकी सिलिकॉन लाया गया?
पुराने बुज़ुर्ग पटवारी बिल्हा तहसील में बेख़ौफ़ काम कर रहा है। देखें प्रशासन इस बार कार्रवाई करेगा या फिर फ़ाइल दबाएगा।
