5 लाख का विधायक और 15 लाख का समर्थक

5 लाख का विधायक और 15 लाख का समर्थक

सत्ता के नशे में चूर समर्थक कुछ भी कर रहे हैं। अब एक मंत्री के करीबी को ही ले लीजिए। पैसे कमाने के लिए उसने एक विधायक के नाम को ही भुना लिया। हुआ यूं कि समर्थक को एक नर्सिंग होम की खामियों के बारे में पता चल गया। फिर क्या था, नर्सिंग होम के संचालक के पास जा धमका। पहले तो खुद के बारे में लंबा-चौड़ा प्रेजेंटेशन दिया। कहा- फलां मंत्री से मेरी अच्छी जमती है। जिले में वो भी दौरा करने आते हैं। सूचना पहले ही मुझे मिल जाती है। जिस तरह से उसने अपने आपको वहां पेश किया, उसी तर्ज पर उसकी आवभगत भी हुई। चाय-नाश्ता से बरी होने के बाद समर्थक मुद्दे पर ही आ गया। नर्सिंग होम संचालक से कहा कि मैं आपका शुभचिंतक हूं, पर फलां विधायक आपसे खफा हैं। आपके नर्सिंग होम की खामियों की लिस्ट बना रखी है। पता नहीं, कब जांच करवा दें। संचालक ने कारण पूछा तो जवाब मिला- एक साल से ज्यादा उनकी विधायकी हो गई, लेकिन आज तक आपकी ओर से मिठाई का डिब्बा नहीं पहुंचा। नर्सिंग होम संचालक समझ गया। गलती स्वीकारी और समर्थक से कहा- अब आप ही मेरी ओर से मिठाई का डिब्बा पहुंचा दीजिए। इतना सुनते ही समर्थक के चेहरे पर कुटिल मुस्कान बिखर गई। ऐसा हो भी क्यों ना, तीर जो निशाने पर लग चुका था। समर्थक ने डॉक्टर से कहा- हां आपके लिए ये तो करना ही पड़ेगा, पर वजन कुछ ज्यादा होगा तभी। वजन का सौदा कितने किलोग्राम से शुरू हुई, ये तो पता नहीं, पर बात 20 किलो में जम गई। यानी कि 20 लाख रुपए। समर्थक नर्सिंग होम संचालक से 20 लाख रुपए लेकर निकला और दूसरे दिन विधायक को 5 लाख रुपए भेंट स्वरूप सौंप दिया। पूछताछ करने पर समर्थक ने इतना ही कहा कि फलां नर्सिंग होम संचालक ने चंदा भेजा है, ताकि उनका ख्याल रखा जाए। बेचारे विधायक को अब तक यह नहीं पता चला है कि उनके नाम से 20 लाख आया, लेकिन उनकी कीमत सिर्फ पांच लाख रुपए आंक दी गई।

बड़बोले नेता बोले- सीएम से करता हूं बात और हो गया काम

बिलासपुर जिले में स्थित एक विश्वविद्यालय के खिलाफ सीएम सचिवालय से जांच कराई जा रही है। कुलपति पर गंभीर आरोप है। गड़बड़ी करोड़ों रुपए में है। पिछले दिनों रायपुर से जांच टीम भी यूनिवर्सिटी भी आई थी। इसकी भनक लगते ही जिले के एक बड़बोले नेता सक्रिय हो गए। सीधे जा पहुंचे कुलपति के पास। संगठन में उनका कद प्रदेश स्तरीय है, जिसका उन्होंने कुलपति के सामने परिचय के रूप में बखान किया। फिर कहा- जांच टीम आई थी, क्या हुआ। आप चाहेंगे तो यह जांच मैं रुकवा सकता हूं, सीएम से मेरी सीधे बात होती है। बड़बोले नेता का इतना कहना था कि कुलपति दंडाशरण हो गए। कहा- इसके बदले में मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं। बड़बोले नेता ने सिक्युरिटी गार्ड का ठेका अपने समर्थक के नाम पर देने की शर्त रख दी। यह काम कुलपति के बांए हाथ का खेल था। लिहाजा, उन्होंने उनके कहने पर ठेका दे दिया। अब ठेके से बड़बोले नेता की हर माह 1 लाख रुपए की ऊपरी कमाई हो गई। दूसरी ओर बेचारे कुलपति यह आस लगाए बैठे हैं कि नेताजी सीएम से बात कर उनकी गड़बड़ी पर पर्दा डाल देंगे, पर यह पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि आखिर उनका काम कब होगा।

…जब एमआईसी मेंबर को मोहल्लेवाले देने लगे गालियां

कोरोना काल में हर कोई फूंक-फूंककर कदम रहा है। केंद्र हो या राज्य सरकार, लगातार एडवाजरी जारी कर रही है। मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंस का पालन करने की सलाह दी जा रही है। शहर सरकार के जनप्रतिनिधि भी अपने-अपने वार्डों में नागरिकों को यही सीख दे रहे हैं। एक एमआईसी मेंबर को उनके मोहल्लेवाले यह कहकर गालियां दे रहे थे कि बात बड़ी-बड़ी करते हैं और खुद पालन नहीं करते। दरअसल हुआ यूं कि सामान्य सभा में शामिल होने के बाद एक एमआईसी मेंबर ने भी अपना कोरोना टेस्ट कराया। रिपोर्ट निगेटिव आई। अलबत्ता, निश्चिंत होकर वह वार्डों के नागरिकों के संपर्क में रहा। एक दिन उनके घर सीधे एम्बुलेंस पहुंच गई। पीपीई किट पहने स्वास्थ्य कर्मी एम्बुलेंस से उतरे। यह नजारा देख आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। पूछताछ करने पर स्वास्थ्य कर्मी बोले- आपके पार्षद को कोरोना है। उन्हें लेने आए हैं। इतना सुनते ही मोहल्लेवाले पार्षद को उनके घर के सामने ही गालियां देने लगे। यह सुनकर पार्षद ने सीधे सीएमएचओ को फोन लगाया और कहा कि आप सीधे फोन कर कोरोना पाजिटिव की जानकारी दे सकते थे, मैं खुद ही आ जाता। अब मोहल्लेवाले गालियां दे रहे हैं। कह रहे हैं- किसी को कुछ हुआ तो मैं ही जिम्मेदार रहूंगा। अब क्या करुं।

उन्होंने स्वस्थ होने के बाद इसकी सजा भुगतने की चेतावनी सीएमएचओ को दे रखी है।

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