बिलासपुर: फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी का आरोप… नोटिस के बाद भी बयान देने नहीं आईं उप संचालक कमला सिंह…

बिलासपुर/कोटा, 11 अप्रैल 2026

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की उप संचालक कमला सिंह पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोपों की जांच तेज हो गई है। मामले में नया मोड़ तब आया जब कोटा SDM कार्यालय द्वारा नोटिस जारी करने के बावजूद आरोपी अधिकारी बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचीं।

SDM की सुनवाई में अनुपस्थित रहीं कमला सिंह

कोटा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को बयान के लिए नोटिस जारी किया था। तय तारीख पर शिकायतकर्ता पूजा कुशवाहा SDM कार्यालय पहुंचीं और अपना विस्तृत बयान दर्ज कराया। उन्होंने स्कूल रिकॉर्ड, मार्कशीट और दाखिल-खारिज रजिस्टर समेत सभी दस्तावेज भी पेश किए।

हालांकि, आरोपित उप संचालक कमला सिंह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं। इस कारण जांच में उनका पक्ष दर्ज नहीं हो सका है। SDM कार्यालय ने अब अगली तारीख तय कर उन्हें पुनः उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला

शिकायत के अनुसार, कमला सिंह, पिता तिरथराम, निवासी नवागांव, तहसील कोटा ने वर्ष 2008 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जनजाति “गोंड” का स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाया। यह प्रमाण पत्र 5 फरवरी 2008 को राजस्व प्रकरण क्रमांक 218/बी-121/2007-08 के तहत जारी हुआ था।

शिकायतकर्ता का दावा है कि कमला सिंह के प्राथमिक शाला मोगरा से लेकर हाईस्कूल 1989 और इंटरमीडिएट 1993 तक के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों में जाति सतनामी दर्ज है। 12वीं की अंकसूची में नाम कमला बाई के स्थान पर कमला पटेल और पिता का नाम तिरथराम पटेल दर्ज होने से कूटरचना की आशंका भी जताई गई है।

जांच का दायरा बढ़ा

SDM कार्यालय अब शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेज और 2008 में जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्रकरण की समीक्षा कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई तय होगी।

इस संबंध में उप संचालक कमला पटेल ने पहले भी मीडिया से कहा था कि, “मेरे खिलाफ बिलासपुर में शिकायत हुई है। मामला जांचाधीन है, इसलिए अभी मैं कोई टिप्पणी नहीं कर पाऊंगी।”

फिलहाल प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर हलचल है और सभी की नजरें SDM की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।