छत्तीसगढ़: शाला विकास समितियों से “राजनीति” आउट… 75% सदस्य माता-पिता होंगे शामिल… अब अभिभावक चुनेंगे अध्यक्ष और शासन से बिना अनुमति कर सकेंगे एक लाख खर्च…
नई व्यवस्था के तहत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या बाहरी नियुक्ति से तय नहीं होंगे, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में से चुने जाएंगे।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी स्कूलों में अब तक काम कर रही शाला विकास समिति (एसएमडीसी) भंग कर दी गई है। उनकी जगह अब नई स्कूल संग्रहालय समिति (एसएमसी) संगीत की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी शिक्षकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं। नई व्यवस्था के तहत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या बाहरी उकसावे से तय नहीं होंगे, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के इरादों से चुनेंगे।
पिछले साल तक स्कूल की शाला विकास समिति के अध्यक्ष और अन्य संगठनों के सुझाव सीधे तौर पर राजनीतिक थे। आम तौर पर स्थानीय अध्यक्ष या प्रभारी मंत्री अपनी पसंद के अनुसार अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की नियुक्ति करते थे। नए सिस्टम में नेताओं का हस्तक्षेप पूरी तरह से ख़त्म हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी एसएमसी-2026 संग्रहालयों में यह बदलाव किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों में नई समिति का गठन सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था में समिति के कुल सदस्यों की संख्या स्कूल में दर्ज बच्चों की संख्या के आधार पर तय होगी। 100 से अधिक छात्र वाले ज्वालामुखी में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 छात्र वाले ज्वालामुखी में 15 से 20 सदस्य और 500 से अधिक छात्र वाले ज्वालामुखी में 20 से 25 सदस्य।
अब 1 लाख तक के वेतन का कार्य का निर्णय स्वयं समिति
नई एसएमसी को वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। ईसाइयों में 1 लाख रुपये तक के निर्माण और संग्रह कार्य समिति स्वयं कराधान। इसके लिए अलग से डिवाइनलाइन मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इन कार्यों में शौचालय निर्माण या, पिरामिड व्यवस्था, बिजली व्यवस्था, छोटी टोकरी और अन्य ढांचे से जुड़े काम शामिल हैं। कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी आकलन और भुगतान की व्यवस्था भी तय की गई है। 1 लाख रुपये से अधिक की लागत वाले निर्माण और पैदल यात्रा के लिए वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।
ये प्रमुख अधिकार और जिम्मेदारियाँ
– हर माह कम से कम एक बैठक आयोजित करना अनिवार्य है।
– विद्यालय में बच्चों का नियमित नामांकन एवं उपस्थिति सुनिश्चित करना।
– स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें वापस मुख्यधारा में लाने का प्रयास।
– स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए नामांकन अभियान चलाना।
– अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) में सहयोग करना। एफएलएन लक्ष्य की प्राप्ति में सहयोग।
– पोषण पोषण (मिड-डे माइल्स) और स्वास्थ्य संबंधी प्रयोगशाला का पर्यवेक्षण।
– स्कूल विकास योजना (एसडीपी) तैयार करने में भागीदारी।
– बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करना।
– स्कूल अनुदान राशि के उपयोग की निगरानी करना।
येह्यूगे समिति के अन्य 25 प्रतिशत सदस्य
नई एसएमसी में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मार्टीन के पास खरीदें। स्थानीय निकायों का एक नामांकित प्रतिनिधि, एक शिक्षक, स्थानीय शिक्षाविद् या विषय विशेषज्ञ, पूर्व छात्र, शैक्षणिक कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता या नालोग को सदस्य बनाया जाएगा। विद्यालय के प्रयोगशाला या प्रभारी कार्यशाला समिति के सदस्य सचिव होंगे।
