कोरबा ब्रेकिंग: शिक्षा संभाग बिलासपुर की जांच में बड़ा खुलासा… शाउमाशा तुमान के चार छात्रों को बिना परीक्षा प्रैक्टिकल अंक देने की पुष्टि… तुमान के प्राचार्य पी पटेल और अग्रसेंटर प्रभारी निकले दोषी… एक-एक लाख लेने के गंभीर आरोप से मिली मुक्ति… पढ़िए जांच रिपोर्ट के मुख्य अंश और जानिए जांच अधिकारी ने क्या कहा…

कोरबा। शिक्षा संभाग बिलासपुर द्वारा कराई गई निष्पक्ष जांच में यह प्रमाण सामने आ ही गया कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल तुमान के उन चार छात्रों को भी प्रैक्टिकल अंक दिए गए, जो माशिमं द्वारा आयोजित बोर्ड  परीक्षा में ही शामिल नहीं हुए थे। इस मामले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला तुमान के प्राचार्य पुरुषोत्तम पटेल और अग्रगमन कोचिंग सेंटर के प्रभारी मनोहर प्रताप सिंह को दोषी पाया गया है, जिन पर सिविल सेवा आचरण के नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है। हालांकि जांच में यह साबित नहीं हो पाया कि चारों छात्रों को प्रैक्टिकल अंक देने के बदले में किसी तरह का लेनदेन किया गया था। जांच रिपोर्ट में यह भी बात कही गई है कि छात्रों के नतीजे वाट्सएप ग्रुप पर करने की जांच साइबर सेल से करानी चाहिए।

कोरबा: हायरसेकेंडरी स्कूल तुमान के प्राचार्य का बड़ा कारनामा… प्रैक्टिकल परीक्षा में गैरहाजिर 12वीं के चार छात्रों को कर दिया पास… संयुक्त संचालक तक पहुंचा मामला… एक-एक लाख रुपए लेने का गंभीर आरोप…

कोरबा के करतला ब्लॉक स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल तुमान पीछे एक महीने से सुर्खियों में छाया हुआ है। कई सालों से अच्छा परिणाम देने वाले इस स्कूल की छवि भी राज्य में अच्छी है। इस साल माशिमं द्वारा आयोजित प्रैक्टकिल परीक्षा में शामिल नहीं होने वाले चार छात्रों और अगग्रमन सेंटर में अध्ययनरत 63 प्रतिाभावन छात्रों के प्रायोगिक अंक वाट्एएप ग्रुप में वायरल होने की शिकायत शिक्षा संभाग बिलासपुर से लेकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से की गई थी। दोनों तरह की शिकायतें मिलने के बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। दरअसल, एक शिकायत में एक-एक लाख रुपए लेकर अनुपस्थित छात्रों को प्रायोगिक अंक देने का गंभीर आरोप था तो दूसरी शिकायत में नतीजे निकलने से पहले वाट्सएप ग्रुप पर अग्रगमन सेंटर के छात्रों का अंक लीक करने का आरोप था, जबकि बोर्ड परीक्षा के नतीजे नहीं निकले थे। बिलासपुर से प्रकाशित न्यूज वेबसाइट www.aajkal.info ने जनता और सरकार के सामने दोनों शिकायतों को सामने लाने का बीड़ा उठाया और अपने अलग-अंक में शिकायतों का प्रर्दाफाश किया। समाचार में दोनों पक्षों की बातें रखी गईं। मीडिया में शिकायतें सामने आने के बाद शिक्षा संभाग बिलासपुर में हड़कंप गया। आनन-फानन में शिक्षा संभाग बिलासपुर के संयुक्त संचालक ने अपर संचालक आरएन हीराधर के नेतृत्व में दोनों शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित कर दी। जांच अधिकारी व अपर संचालक हीराधर ने अपनी जांच रिपोर्ट बीते दिनों संयुक्त संचालक को सौंप दी है।

प्रायोगिक अंक लीक कांड: जांच अधिकारी ने तुमान के प्राचार्य पी पटेल को लगाई जमकर फटकार… सात घंटे तक दर्ज किया बयान… शिक्षकों ने कहा- प्राचार्य ने वाट्सएप ग्रुप में वायरल किया था नंबर… पेश किए ये सबूत…

जांच अधिकारी हीराधर ने www.aajkal.info को बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट संयुक्त संचालक को सौंप दी है। शिकायत में प्राचार्य पी पटेल पर एक-एक लाख रुपए लेने के जो आरोप थे, जांच में उसकी पुष्टि नहीं हुई। जांच में चार स्टूडेंट्स के अलावा प्राचार्य पी पटेल, तुमान स्कूल के तीन शिक्षकों का बयान लिया गया। जांच में कोरबा डीईओ, अग्रगमन सेंटर प्रभारी व माशिमं बिलासपुर का भी सहयोग लिया गया।

उन्होंने बताया कि सभी के लिखित बयान और जवाब आने के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि प्राचार्य पी पटेल द्वारा चारों छात्रों से एक-एक लाख रुपए लेने की पुष्टि नहीं होती है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला तुमान में अध्ययरनत चारों छात्र अपनी मूल संस्था की प्रायोगिक प्रायोगिक परीक्षा में अनुपस्थित थे। अग्रगमन प्रशिक्षक संस्था में अनाधिकृत रूप से प्रायोगिक परीक्षा आयोजन कर छात्र-छात्राओं के नंबर उनकी मूल संस्था को वाट्सएप के माध्यम से भेजा गया। उसके बाद यह वायरल हुआ, परंतु इस बात की पुष्टि नहीं होती है कि अंकों को वायरल करने में किनकी-किनकी भूमिका रही और इसकी शुरुआत कहां से हुई। इसलिए इसकी जांच साइबल सेल कोरबा से कराया जाना उचित होगा। जांच में निकलकर आए तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकत है कि निश्चित रूप से प्रतिभावान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है और परीक्षा से पहले समय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है, जिसमें अग्रगमन कोचिंग संस्था के प्रभारी व प्राचार्य शाउमाशा तुमान की मुख्य भूमिका रही है। इनका यह कृत्य छग सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 2 एवं 11 के विपरीत है। इसलिए इनके विरुद्ध नियमानुसा अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाना प्रस्तावत है।  

 

नोट: जांच के दौरान किस-किस का लिया गया बयान… किसने क्या कहा… डीईओ कार्यालय से क्या जवाब आया… माशिमं बिलासपुर ने क्या कहा… यह जानने के लिए पढ़ते रहिए www.aajkal.info