बिलासपुर ब्रेकिंग: 76.73 लाख की पेनाल्टी, 50.82 लाख लेकर ही श्रीराम केयर का अवैध निर्माण नियमित..! 25.91 लाख रुपये कम जमा होने पर भी टीएनसी ने कर दिया नियमितीकरण… कलेक्टर-एसपी वाली समिति के फैसले को विभाग ने कैसे किया दरकिनार..?
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक श्रीराम केयर हॉस्पिटल का कुल भूखंड क्षेत्रफल 3683.45 वर्गमीटर है। अस्पताल प्रबंधन को 3436.40 वर्गमीटर निर्माण की अनुमति मिली थी। जांच में 2039.77 वर्गमीटर अवैध निर्माण की पुष्टि हुई।

बिलासपुर। सरकारी नियम-कानून आम आदमी के लिए सख्त और रसूखदार संस्थानों के लिए नरम हैं? नेहरू नगर-कुदुदंड स्थित श्रीराम केयर हॉस्पिटल के अवैध निर्माण के नियमितीकरण का मामला कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार श्रीराम केयर हॉस्पिटल के 2039.77 वर्गमीटर अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए जिला स्तरीय नियमितीकरण प्राधिकारी समिति ने 76 लाख 73 हजार 225 रुपए की पेनाल्टी निर्धारित की थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने महज 50 लाख 82 हजार 2०1 रुपए ही जमा किए और टाउन एंड कंट्री प्लानिग (टीएनसी) ने इसी कम राशि पर नियमितीकरण की कार्यवाही पूरी कर दी। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर समिति द्बारा तय 25 लाख 91 हजार 24 रुपये कम क्यों वसूले गए? किस अधिकारी ने इतनी बड़ी राहत देने का अधिकार इस्तेमाल किया? और शासन के राजस्व की भरपाई की जिम्मेदारी कौन लेगा? सवाल यह भी है कि क्या समिति के निर्णय में कोई बदलाव किया गया था? यदि हां, तो किस सक्षम प्राधिकारी ने इसकी अनुमति दी? यदि नहीं, तो पूरी पेनाल्टी जमा कराए बिना नियमितीकरण किस नियम के तहत किया गया? एक नोटशीट से लाखों की पेनाल्टी कम कैसे हो गई? पूरा मामला अब टीएनसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जब जिला स्तरीय समिति ने जुर्माने की राशि तय कर दी थी तो क्या विभागीय अधिकारी को अपनी ओर से कम राशि स्वीकार करने का अधिकार था? क्या समिति के निर्णय को बदलने के लिए दोबारा बैठक हुई? क्या कलेक्टर, एसपी और नगर निगम आयुक्त की सहमति ली गई?
3683 वर्गमीटर के भूखंड पर निर्माण में मिली गड़बड़ी
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक श्रीराम केयर हॉस्पिटल का कुल भूखंड क्षेत्रफल 3683.45 वर्गमीटर है। अस्पताल प्रबंधन को 3436.40 वर्गमीटर निर्माण की अनुमति मिली थी। जांच में 2039.77 वर्गमीटर अवैध निर्माण की पुष्टि हुई। इसके बाद अस्पताल के भागीदार डॉ. अमित सोनी, पिता राजकुमार सोनी ने छत्तीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितीकरण अधिनियम संशोधन 2022 की धारा-6 के तहत अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए आवेदन किया।
कलेक्टर, एसपी और निगम आयुक्त वाली समिति ने तय की 76.73 लाख की पेनाल्टी
टीएनसी ने नियमितीकरण के आवेदन को जिला स्तरीय नियमितीकरण प्राधिकारी समिति के समक्ष रखा। इस समिति में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त और टीएनसी के संयुक्त संचालक शामिल होते हैं। समिति की बैठक 7 फरवरी 2००3 को हुई। बैठक में अस्पताल के 2०39.77 वर्गमीटर अवैध निर्माण को नियमित करने के एवज में 76 लाख 73 हजार 225 रुपये की पेनाल्टी निर्धारित की गई। यानी अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए समिति ने बाकायदा आर्थिक दंड तय किया था। इसके बाद इस निर्णय का पालन कराना टीएनसी की जिम्मेदारी थी।
नोटिस 76.73 लाख का, चालान सिर्फ 50.82 लाख का!
वर्ष 2024 में टीएनसी ने अस्पताल के भागीदार डॉ. अमित सोनी को निर्धारित राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किया। इसके बाद मार्च 2024 में डॉ. सोनी ने चालान के माध्यम से 50 लाख 82 हजार 201 रुपए जमा कराए। चालान की प्रति के साथ इसकी सूचना टीएनसी को दी गई। हैरानी की बात यह है कि 76 लाख 73 हजार 225 रुपए की निर्धारित पेनाल्टी के मुकाबले 25 लाख 91 हजार 24 रुपए कम जमा हुए। इसके बावजूद 15 मार्च 2024 को टीएनसी के जिम्मेदार अधिकारी ने नोटशीट चलाकर जमा राशि का उल्लेख किया और नियमितीकरण की कार्यवाही पूरी कर दी।
शासन को 25.91 लाख का नुकसान, जिम्मेदार कौन?
समिति द्बारा तय पेनाल्टी और जमा चालान के बीच 25 लाख 91 हजार 24 रुपए का अंतर है। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह शासन के राजस्व से जुड़ा गंभीर मामला है। यदि निर्धारित पेनाल्टी में कोई वैधानिक छूट या संशोधन नहीं हुआ था तो कम राशि पर नियमितीकरण किए जाने से शासन को राजस्व की हानि होने का सवाल उठता है।
सीएम पोर्टल में शिकायत होगी
दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले युवक का कहना है कि अगर इस मामले पर जिला स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे सीएम पोर्टल में अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे। इससे पहले वे जिला स्तरीय समिति, निगम आयुक्त और टीएनसी से शिकायत कर जांच की मांग करेंगे।
हमने अवैध निर्माण के नियमितीकरण के लिए आवेदन किया था। समिति ने 76 लाख 73 हजार रुपए जुर्माना लगाया था। बाद में कलेक्टर से हमने अवैध निर्माण क्ष्ोत्र कम होने और फिर से जांच कराने का आग्रह किया था। दोबारा हुई जांच में अवैध निर्माण का क्ष्ोत्र कम पाया गया। लिहाजा, संशोधित जुर्माना राशि का भुगतान किया गया और उसके बाद नियमितीकरण किया गया है।
– डॉ. अमित सोनी
भागीदार, श्रीराम केयर हॉस्पिटल, नेहरू नगर (कुदुदंड) बिलासपुर
