बिलासपुर छत्तीसगढ़: कांग्रेस नेता और हिस्ट्रीशीटर संजू हत्याकांड… 56 गवाह, 265 दस्तावेज और 350 पेज का फैसला… फिर भी संजू के हत्यारों को सजा नहीं दिला सकी पुलिस… पढ़िए पूरी खबर और जानिए कहां कहां फेल हो गई पुलिस….
पोस्टमार्टम और चालान के बीच अंतर तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में कमियों के चलते अभियोजन का पक्ष कमजोर पड़ा। हत्या के चश्मदीद समेत निजी गवाह भी अपने बयान से मुकर गए।

बिलासपुर। संजू त्रिपाठी हत्याकांड में पुलिस की जांच और गवाही पर कोर्ट के फैसले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस हत्याकांड में संपत्ति विवाद को वजह बताते हुए छोटे भाई कपिल त्रिपाठी समेत 24 लोगों को आरोपी बनाया गया था, उसमें पुलिस हत्याकांड की साजिश से लेकर आरोपियों की भूमिका तक साबित नहीं कर पाए। करीब 350 पेज के फैसले में जांच की खामियां उजागर हुईं। मौत के समय से जुड़े रिकॉर्ड, गोलियों की संख्या, स्क्रूटनी और चालान के बीच अंतर तथा इलेक्ट्रॉनिक गवाही में कमियों के चलते अभियोजन का पक्ष कमजोर पड़ा। हत्या के चश्मदीद समेत निजी गवाह भी अपने बयान से मुकर गए। शुक्रवार को अतिरिक्त दशम सत्र जज आदित्य जोशी की कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। अब दोषी रजनेश सिंह ने फैसले का अध्ययन कर हाईकोर्ट में अपील करने और जांच में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बात कही है। शुक्रवार को अतिरिक्त दशम सत्र जज आदित्य जोशी की कोर्ट ने संजू के भाई कपिल त्रिपाठी समेत सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। 14 दिसंबर 2022 को सकरी बाइपास पर दिनदहाड़े संजू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने जांच में संपत्ति विवाद को हत्या की वजह बताई थी। आरोप था कि छोटे भाई कपिल त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के शूटरों को सुपारी देकर हत्या की साजिश रची थी। पुलिस ने इस मामले में कुल 24 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 22 गिरफ्तार हुए, जबकि दो फरार हैं।
350 पेज के फैसले में सामने आईं जांच की खामियां
- मौत के 15 घंटे बाद ईसीजी और एक्सरे: पुलिस ने रास्ते में संजू की मौत का समय शाम 4.15 बजे दर्ज किया था। इसके करीब 15 घंटे बाद अपोलो अस्पताल में ईसीजी और एक्सरे किए जाने का उल्लेख मिला। पुलिस यह नहीं बता पाई कि इस दौरान शव कहां रखा गया था।
- 13 गोलियां चलने का दावा साबित नहीं: इनाम में कार पर 13 गोलियां चलने की बात कही गई, लेकिन जांच में कार पर इतनी गोलियों के निशान नहीं मिले। कार के अंदर से भी गोलियां बरामद नहीं हुईं।
- सचिवालय और शेष में अंतर: सचिवालय में शरीर से तीन गोलियां निकलने का उल्लेख है, जबकि शेष में डॉक्टर सरकार के बाद छह गोलियां मिलने का दावा किया गया। पुलिस इस अंतर को स्पष्ट नहीं कर पाई।
- 56 गवाहों में निजी गवाह मुकर गए: पुलिस ने 56 गवाहों के बयान और 265 दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। आरोपियों पर मौजूद पान ठेला संचालक सहित निजी गवाह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए।
- संपत्ति विवाद साबित नहीं: दस्ते में हत्या की वजह संजू और कपिल के बीच संपत्ति विवाद को बताया गया था, लेकिन पुलिस इसे कोर्ट में प्रमाणित नहीं कर पाई।
- इलेक्ट्रॉनिक गवाही में कमी: मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल निकलवाने वाले नंदल अधिकारियों के बयान पेश नहीं किए गए। इलेक्ट्रॉनिक गवाही के लिए जरूरी 65बी प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया।
- आरोपियों की भूमिका स्पष्ट नहीं: पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि हत्या की साजिश में कौन-कौन शामिल था और किसकी क्या भूमिका थी।
इन्हें बनाया गया था आरोपी
1. कपिल त्रिपाठी (संजू का भाई)
2. जयप्रकाश त्रिपाठी (संजू के पिता)
3. सुचित्रा त्रिपाठी (कपिल की पत्नी)
4. भरत तिवारी (कपिल का जीजा)
5. रवि तिवारी (कपिल का भांजा)
6. अमन गुप्ता असल सोनू
7. कल्याणी तिवारी पति भरत
8. प्रेम नर्तक बजरंग श्रीवास
9. सुमित निर्मलकर
10. आशीष तिवारी
11. उपेंद्र कुमार ठाकुर
12. केदार सिंह ठाकुर
13. रमेश राजपूत
14. रवि सिंह राजपूत
15. सावन पाठक
16. मोनू कल्याण अभिषेक मिश्रा
17. परवेज कुख्यात राजू अंसारी
18. प्रशांत गुप्त
19. नजीब अंसारी वान इरफान
20. यूसुफ हुसैन
21. पप्पू डाहरे (जेल में बंद)
22. वनीश अंसारी (जेल में बंद)
23. फ़याज अंसारी (फ़रार)
24. विनय द्विवेदी (फरार)
जांच में उनकी भूमिका
- एसआई सागर पाठक: मुख्य विवेचना
- एसएसआई उदयभान सिंह: इंस्पेक्टर
- कांस्टेबल सुनील सूर्यवंशी: कांस्टेबल
- एसएसआई जीवन साहू: मार्ग पंचनामा
- एसएआई प्रभाकर तिवारी की कॉल डिटेल
- हेड कांस्टेबल अशोक सिंह: निरीक्षण
- एसआई दिनेश चंद्रा: ट्रांजिट रिमांड
शपथ बोलें- हाईकोर्ट में करेंगे अपील
दीक्षित रजनेश सिंह ने कहा कि कोर्ट के फैसले का विस्तृत अध्ययन कर नियमानुसार हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। जांच में जिन कर्मचारियों और अधिकारियों ने फीस वसूली या गलती की है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।