छत्तीसगढ़: कांग्रेस का आरोप-  पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने आय से कई गुना अधिक संपत्ति बनाई… तीन चुनावों के बीच 10 गुना से अधिक बढ़ गई संपत्ति…

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पिछले दिनों एक पत्रवार्ता में मंत्री रविंद्र चौबे को ‘घोटालों का महानायक’ कहा था। डॉ. रमन के इस बयान के बाद अब कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने डॉ. रमन पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में मंगलवार को कांग्रेस भवन में एक प्रेस वार्ता ली गई जिसमें प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

प्रदेश कांग्रेस मीडिया सेल के प्रभारी और पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा कि हम सवाल पूछना चाहते हैं कि रमन सिंह की संपत्ति 2008 से 2018 के तीन चुनावों के बीच कैसे दस गुना से अधिक बढ़ गई? उन्होंने ऐसा क्या किया जिससे उनकी संपत्तियां इस तरह बढ़ती गईं? उनके और उनकी पत्नी के पास इतना पैसा कहां से आया?

साधारण परिवार, न करोबार न उद्योग

त्रिवेदी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा- पूरा छत्तीसगढ़ जानता हैं कि रमन सिंह एक अत्यंत सामान्य आर्थिक परिस्थिति के परिवार से आते हैं और उनके परिवार के पास न तो अधिक ज़मीन जायजाद है और न कोई पुश्तैनी कारोबार या उद्योग है। उनके पिता विघ्नहरण सिंह एक सामान्य वकील थे। ख़ुद रमन सिंह ने आयुर्वेद में डिग्री ली है और वे कवर्धा में एक असफल डॉक्टर के रूप में कार्यरत रहे। उन पर आश्रित बच्चों ने प्रोफ़ेशनल डिग्रियां ली हैं और ज़ाहिर है कि इसमें भी अच्छा ख़ासा पैसा खर्च हुआ होगा, लेकिन उनकी संपत्ति में आय से कई गुना अधिक की वृद्धि हुई है। हमने उनके तीन चुनाव शपथ पत्र निकालकर देखे हैं।

कहां से आया पैसा?

त्रिवेदी ने आगे कहा- चुनाव लड़ते वक़्त चुनाव आयोग के निर्देशानुसार संपत्तियों, कमाई और खर्च का जो विवरण डॉ रमन सिंह ने जमा किया है, यह सिर्फ़ उसका आकलन है। इस आकलन के अनुसार वर्ष 2008 में उनके पास एक करोड़, चार लाख की संपत्ति थी। उस समय तक रमन सिंह मुख्यमंत्री के रूप में एक कार्यकाल पूरा कर चुके थे, लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने ऐसा कुछ उल्लेखनीय करना शुरु किया जिससे कि उनकी संपत्ति अगले चुनाव तक यानी वर्ष 2013 तक बढ़कर पांच करोड़ 61 लाख हो चुकी थी। वर्ष 2008 से वर्ष 2013 तक रमन सिंह की संपत्ति पांच गुने से अधिक बढ़ गई। मुख्यमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल के समाप्त होने तक यानी वर्ष 2018 में उन्होंने चुनाव आयोग को बताया कि उनकी संपत्ति दो गुना होकर 10 करोड़ 72 लाख हो चुकी थी। यह स्थिति तब है जब उनकी आय अत्यंत सीमित थी. वर्ष 2012-13 में उन्होंने जो आयकर रिटर्न भरा था उसके अनुसार उनकी आय 14 लाख 60 हज़ार के क़रीब थी। इसी दौरान उनकी पत्नी की आय 12 लाख 52 हज़ार के क़रीब थी। वर्ष 2013 में रमन सिंह पर 28 लाख से अधिक का कर्ज़ था, लेकिन वह भी उन्होंने पांच साल के भीतर चुका दिया था क्योंकि वर्ष 2018 के चुनाव में उन्होंने बताया है कि उन पर कुल देनदारी तीन हज़ार रुपये ही बची थी। यह इतना बड़ा कर्ज़ उन्होंने कैसे चुकाया? इतनी कम आय में संपत्तियां दस गुना कैसे बढ़ी यह जांच का विषय है?

लगाए यह आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आगे कहा कि वर्ष 2008 से 2018 तक के विवरण को यदि आप सरसरी तौर पर भी देखें तो आपको लगेगा कि पता नहीं रमन सिंह और उनकी पत्नी को ऐसा कौन सा पारस पत्थर मिल गया था कि उनके पास सोना और चांदी की मात्रा बेतहाशा बढ़ती रही।

2008 के चुनाव के वक्त रमन सिंह के पास 23 तोला सोना था जो वर्ष 2013 के चुनाव तक बढ़कर 55 तोला हो चुका था। इसकी क़ीमत भी बढ़कर पांच लाख से 26.40 लाख हो चुकी थी। इसी अवधि में रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह के पास सोना चार गुना बढ़ चुका था।

चुनावी शपथ पत्र के अनुसार वीणा सिंह के पास सोना 55 तोले से बढ़कर 217 तोला हो गया था। यानी 2013 के चुनाव तक वीणा सिंह के पास दो किलो से अधिक सोना हो चुका था। क़ीमत के अनुसार देखें तो 7.5 लाख रुपए के सोने से वे 80.80 लाख के सोने तक पहुंच चुकी थीं। पति पत्नी दोनों की आय लगभग 27 लाख रुपये सालाना थी, लेकिन उनकी संपत्ति पांच गुना बढ़कर एक करोड़ से पांच करोड़ हो चुकी थी। 2008 से 2013 के बीच वीणा सिंह के पास सिर्फ़ सोना ही नहीं बढ़ा चांदी भी आठ किलो से बढ़कर 18 किलो हो चुका था। वैसे सोना तो वीणा सिंह के पास 2013 से 2018 तक भी बढ़ता रहा और जब रमन सिंह की पार्टी का छत्तीसगढ़ से सफ़ाया हुआ तो उनके पास 235 तोला सोना था। यानी दो किलो 350 ग्राम सोना। इसकी क़ीमत उस वक़्त 90 लाख रुपये आंकी गई है।

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